‘रण-वे’ बना लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे, एक के बाद एक लड़ाकू विमानों ने किया टच-डाउन

लखनऊ। पूरी दुनिया ने आज भारत की ताकत देखी. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर भारतीय वायुसेना के कुछ लड़ाकू विमानों ने लैंडिग और कुछ से टच डाऊन का अभ्यास किया. देश के किसी एक्सप्रेस-वे पर अपनी तरह का ये सबसे बड़ा ऑपरेशन है।

वायुसेना के 20 विमान आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर उतरे. ये किसी एक्सप्रेस-वे पर अब तक की सबसे बड़ी लैंडिंग थी. मिराज 2000, जगुआर, सुखोई 30, एएन परिवहन, एमआई 17 हेलीकॉप्टर और कैरियर एयरक्राफ्ट जैसे विमानों ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया।

सबसे पहले उतरा C-130 J सुपर हरक्यूलिस

एक्सप्रेस वे पर सबसे पहले ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C-130 J सुपर हरक्यूलिस एक्सप्रेवस-वे पर अपना करतब दिखाया. इसमें से गरुड़ कमांडो अपनी गाड़ियों और साजोसामान के साथ उतरे. यह दुनिया का सबसे बड़ा मालवाहक जहाज है. यह विमान किसी भी मिसाइल को डिटेक्ट करने में सक्षम है. चीन की तरफ से घुसपैठ रोकने के लिए इसकी तैनाती की गई है.

एक्सप्रेवस-वे पर एक के बाद एक तीन मिराज-2000

इसके बाद एक के बाद एक तीन मिराज-2000 विमान उतरे. इसकी स्पीड 2,495 किलोमीटर प्रति घंटा है. वायुसेना में 50 मिराज-2000 विमान हैं. ये विमान दूर तक मार करने के लिए 530D मिसाइल से लैस है. यह हवा में ही दूसरे विमान को मार गिराने में सक्षम है. इसमें 30 MM की तोप लगी है.

जगुआर विमान ने भी दिखाया करतब

जगुआर विमानों ने भी अपना करतब दिखाया. ये विमान 4,750 किलो वजन के साथ उतर सकता है. इस विमान में दो इंजन और 300MM की गन मौजूद है. यह 1,350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बम वर्षा करने में सक्षम है. जगुआर विमान गहराई से मार करने वाले विमान हैं.

सबसे शक्तिशाली विमान है सुखोई 30 MKI 

जगुआर के बाद सुखोई 30 MKI विमान उतरा. इसकी रेंज 5200 किलोमीटर है. यह तीन हजार किलोमीटर दूर तक मार करने में सक्षम है. इसका रडार इसकी सबसे बड़ी ताकत है. यह 8 हजार किलो गोला-बारूद लेने जाने में सक्षम है. यह भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली विमान है. यह दुश्मन विमान की पॉजीशन दूर से पता लगा सकता है.

एक्सप्रेस-वे

चार सेकंड तक जमीन पर रुके लड़ाकू विमान

लड़ाकू विमान सुपरसोनिक सुखोई एसयू-30, जगुआर और मिराज जब आगरा एक्सप्रेस-वे पर उतरे तो उनकी गति 260 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. वैसे तो एक्सप्रेस-वे का पांच किलोमीटर का हिस्सा विमानों के टच और उड़ान भरने के लिए लिया गया था लेकिन केवल तीन किलोमीटर एक्सप्रेस-वे का ही इस्तेमाल किया गया.

पहले भी हो चुके हैं ऐसे अभ्यास

भारत में ये तीसरी बार है कि वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने किसी एक्सप्रेसवे पर इस तरह का अभ्यास किया है.

सबसे पहले मई 2015 में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मथुरा के करीब मिराज विमानों ने लैंडिग की थी.

इसके बाद 21 नवंबर 2016 को एक्सप्रेस-वे पर वायुसेना के छह लड़ाकू विमानों ने प्रदर्शन कर इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज कराया था।

पिछले साल 302 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के बाद इस पर बनाई गई 3.2 किलोमीटर की एयर स्ट्रिप को छूते हुए तीन मिराज और तीन सुखोई लड़ाकू विमान गुजरे थे।

एक्सप्रेस-वे

भारतीय वायुसेना ने क्यों किया ये ड्रिल ?

युद्ध के समय में किसी भी देश की कोशिश होती है कि वो दुश्मन के एयरबेस और एयर-स्ट्रीप को तहस नहस कर दे ताकि उसके लड़ाकू विमानों को उड़ने या फिर लैंड करने का मौका ना दिया जाए. इसीलिए हाईवों को इस तरह के कोंटिजेंसी प्लान के लिए तैयार किया जाता है. 

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