51वीं बार हुआ अशोक खेमका का तबादला, क्रैश लैंडिंग से की ट्रांसफर की तुलना

पानीपत- हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को रविवार को फिर से तबादला हो गया. यह उनका 51वां ट्रांसफर है. खेमका को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिकता विभाग से हटाकर खेल और युवा मामले विभाग का प्रिंसिपल सेकेट्ररी बनाया गया है. लेकिन अब लगता है कि अशोक खेमका भी लगातार हो रहे तबादलों से परेशान हो गए हैं.

अशोक खेमका

ट्रांसफर की खबर मिलने के बाद खेमका ने कहा कि अब तो उनको लगता है कि जैसे भेजा फ्राई हो गया है. उन्होंने ट्वीट भी किया, ”उनका यह ट्रांसफर एक क्रैश लैंडिंग के समान है क्योंकि उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में काफी कुछ प्लानिंग कर रखी थी कि अचानक तबादले की खबर आ गई”.

 

गौरतलब है कि अशोक खेमका की गिनती ऐसे नौकरशाहों में होती है जो नेताओं की कठपुतली नहीं हैं। जो नियम कानून के आगे किसी की नहीं चलने देते। अशोक खेमका द्वारा उजागर गड़बड़ियों और अनियमितताओं के चलते हरियाणा की भाजपा सरकार के तीन मंत्रियों से उनका टकराव हो चुका है.हाल ही सरकारी गाड़ी के दुरुपयोग के मामले में उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्री कृष्ण कुमार बेदी को खूब खरी खोटी सुनाई थी

खेमका ने इसी विभाग के प्रधान सचिव के नाते उनहोने 3.22 लाख लोगों की पेंशन बंद कर दी थी जिनके दस्तावेज मौजूद नहीं थे. इनमें से एक लाख लोगों की पेंशन आज भी बंद है.

कौन हैं अशोक खेमका ?

  1. अशोक खेमका का जन्म पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 30 अप्रैल 1965 को हुआ था।
  2. कोलकाता से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद खेमका ने आईआईटी खड़गपुर से ग्रैजुएशन किया।
  3. इसके बाद उन्होंने मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की।
  4. उन्होंने एमबीए की डिग्री भी ली है।

1993 में पहली पोस्टिंग

  1. खेमका की पहली पोस्टिंग 1993 में हुई थी।
  2. उनके पूरे कार्यकाल में उनकी अधिकतर पोस्टिंग कुछ महीने ही चलीं।
  3. इस दौरान उन्होंने अलग-अलग विभागों में 8 पोस्ट ऐसी संभालीं, जोकि महीने भर या उससे भी कम समय के लिए थीं।
  4. खेमका की 44 में से 12 पोस्टिंग ऐसे डिपार्टमेंट में हुई, जहां उन्हें जमीनी कामकाज में डील करना था।
  5. जहां भूमि के अधिग्रहण से लेकर उसके रिकॉर्ड, रेवेन्यू और विकास तक की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी।
  6. मिनिस्ट्री ऑफ पर्सनल की एग्जेक्युटिव रिकॉर्ड शीट (ईआरएस) में दर्ज जानकारी के मुताबिक, खेमका ने केवल दो ही ऐसी पोस्टिंग संभाली हैं जो एक साल से ज्यादा समय तक रही हों।
  7. 2005-06 में उनका पहला कार्यकाल था
  8. उस वक्त उन्होंने शहरी विकास विभाग में बतौर मुख्य प्रबंधक डेढ़ साल के लिए काम किया।
  9. खेमका ने उद्योग विभाग में 2008 से 2010 के बीच प्रबंध निदेशक के तौर पर काम किया।

 ऐसे चर्चा में आए खेमका

12 अक्टूबर 2012 को अशोक खेमका उस समय सबसे ज्यादा सुर्खियों में छाए जब उन्होंने कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच जमीन को लेकर हुई डील की म्यूटेशन रद्द कर दी थी।

उस समय खेमका चकबंदी महानिदेश के पोस्ट पर कार्यरत थे।

हरियाणा में कांग्रेस की सरकार ने इस मामले के बाद खेमका का ट्रांसफर हरियाणा बीज विकास निगम के महानिदेशक पद पर कर दिया था।

 ईमानदारी के आगे सीएम की भी नहीं सुनी
  1.  2004 में जब सरकार ने कई टीचर्स का, सत्र के बीच में ही ट्रांसफर किया गया  तो उन्होंने तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश
  2. चौटाला तक का आदेश मानने से इनकार कर दिया था।
  3. रॉबर्ट वाड्रा विवाद के दौरान एक इंटरव्यू में उन्होंने बार-बार ट्रांसफर पर अफसोस जताया था।
  4. उन्होंने कहा था कि, सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, मुझे हर बार अपनी ईमानदारी की सजा भुगतनी पड़ी क्योंकि मैं लगातार घपलों और घोटालों का पर्दाफाश करता रहा हूं।

 

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