चिल्ड्रेन डे स्पेशल: बेनियन ट्री स्कूल में कुछ खास, बताया- सिर्फ बेहतर खाने से नहीं जुड़ी बच्चों की सेहत

लखनऊ। बच्चों को खुश रखिए। उन्हें खेलने दीजिए। जैसे चाहें, बढ़ने दीजिए। जितना मन हो, खाने दीजिए। अच्छी आदतें सिखाइए, लेकिन थोपिये नहीं। वक्त के साथ बढ़ते-बढ़ते वो खुद भी सीखेंगे। महात्मा गांधी ने अपनी क्लास में टॉप नहीं किया। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू अव्वल नहीं आए। फिर हम क्यों बच्चों से ऐसी उम्मीद रखते हुए उन पर दबाव डालते हैं कि वो सिर्फ पढ़ाई पर ध्यानन दें। उनकी जिंदगी उन्हें जीने तो दीजिए। चिल्ड्रेंस डे पर गोमती नगर के बेनियन ट्री स्कूल में रिटायर डायरेक्टर मेडिकल यूपी, डॉक्टर केएन पटनी बच्चों की सेहत से जुड़े टिप्स के साथ ही पैरेंट्स को भी कुछ नया सिखा गए।

बच्चों की सेहत से जुड़े सेमिनार में स्कूल के सभी बच्चे और उनके पैरेंट्स पहुंचे थे। इस मौके पर डॉ पटनी ने कहा कि बच्चों की सेहत का ध्याान रखना पैरेंट्स की जिम्मेदारी है। लेकिन अक्सर पैरेंट्स यह नहीं समझ पाते कि बच्चों को क्या खिलाएं और कितना खिलाएं। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, मिनरल जैसी चीजें जरूरी हैं। ये नॉनवेज और वेज दोनों तरह के खाने से मिलती हैं।

Children's Day 2018

डॉ पटनी ने बताया कि अगर घर में शाकाहार बनता है, तो बच्चों को रोजाना दूध पीने के लिए दें। बच्चे दूध न पसंद करें, तो उन्हें दूध से बने दूसरे प्रोडक्ट जैसे पनीर, दही, मट्ठा वगैरह जरूर दें। जिन घरों में नॉनवेज बनता है, वहां के बच्चों को भ्ज्ञी  प्रोटीन-विटामिन की कमी नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि पैरेंट्स को यह भी ध्याभन रखना होगा कि बच्चे जो भी खाएं, वह लिमिट में हो। अक्सर पैरेंट्स बच्चों को ज्यादा से ज्यादा खिलाते हैं। लेकिन इससे सेहत बनती नहीं, बिगड़ती है। खाने में बैलेंस जरूरी है।

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डॉ पटनी ने कहा कि बच्चों को खूब खेलने दें। वह दोस्तों के साथ खेलते वक्त टीम कोऑर्डिनेशन जैसी जरूरी चीजें सीखते हैं। साथ ही उन्हें यह भी पता चलता है कि उनके भीतर क्या काबिलियत है।

एक सवाल के जवाब में डॉ पटनी ने बताया कि बच्चों को हल्की-फुल्की चोट लगना आम बात है। इसकी ज्यादा फिक्र करने की जरूरत नहीं है। हां, यह जरूर देखें कि खेल के दौरान बच्चे एक-दूसरे से लड़ने न लगें।

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उन्होंने बच्चों के पैरेंट्स से आग्रह किया कि घर का खाना खिलाएं। यह सबसे सेहतमंद होता है। बाहर के समोसे में जिस तेल या घी का इस्तेमाल होता है, वह फैटी एसिड पैदा करते हैं। फैटी एसिड सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं।

सेमिनार में पैरेंट्स ने कई सवाल किए। पूछा कि बच्चे को टिफिन में पराठा-सब्जी देते हैं, लेकिन दूसरे बच्चों के टिफिन में जंक फूड देखकर उन्हें अपना टिफिन पसंद नहीं आता है। इसके जवाब में डॉ पटनी ने कहा कि आप सभी को सिर्फ अपने बच्चे की सेहत की जिम्मेदारी नहीं उठानी। अगर कोई भी अपने बच्चे को जंक फूड देगा, तो इससे सिर्फ उसकी ही सेहत पर बुरा असर नहीं होगा, बल्कि सामने वाले बच्चे के मन पर भी बुरा असर पड़ेगा। पैरेंट्स को मिलकर अपने बच्चों की सेहत के लिए फिक्रमंद होना पड़ेगा।

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डॉ पटनी ने कहा कि बच्चों के डाइजेशन के लिए भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर सुबह बच्चे को मोशन नहीं हो रहा है, तो जबरदस्ती न करें। खाना 24 घंटे के भीतर खुद ही मोशन के तौर पर बदल जाएगा, तो बच्चे को खुद ही मोशन आएगा। मोशन की आदत पैरेंट्स के चाहने से नहीं, बल्कि समय के साथ-साथ बदलेगी।

सेमिनार के अंत में बेनियन ट्री स्कूल की हेड मिस्ट्रेस जया चौबे ने डॉक्टर केएन पटनी का शुक्रिया अदा करते हुए उन्हें विदा किया। इस मौके पर स्कूल का पूरा टीचिंग और सपोर्टिंग स्टाफ मौजूद था।

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