जानें आचार्य चाणक्य के मूलमंत्र, सफलता और तरक्की की सीढ़ियां हो जाएंगी आसान

आज के समय में अधिकांश लोगों को धन संबंधी सुख पाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। फिर भी बहुत ही कम लोग पर्याप्त फल प्राप्त कर पाते हैं। व्यक्ति को कुछ कामों में तो सफलता मिल जाती है, लेकिन कुछ कामों में असफलता का मुंह भी देखना पड़ता है। अगर आप सफलता का प्रतिशत बढ़ाना चाहते हैं तो हम आपको बताते हैं एक चाणक्य नीति। इस नीति का ध्यान रखेंगे तो आपको ज्यादातर कामों में सफलता मिल सकती है।

पहली बात: यह समय कैसा है

चाणक्य कहते हैं कि वही व्यक्ति समझदार और सफल है, जिसे इस प्रश्न का उत्तर हमेशा मालूम रहता है। समझदार व्यक्ति जानता है कि वर्तमान समय कैसा चल रहा है। अभी सुख के दिन हैं या दुख के। इसी के आधार पर वह काम करता हैं। अगर सुख के दिन हैं तो अच्छे काम करते रहना चाहिए और दुख के दिन हैं तो अच्छे कामों के साथ धैर्य बनाए रखना चाहिए।

दूसरी बात: हमारे मित्र कौन-कौन हैं

हमें यह मालूम होना चाहिए कि हमारे सच्चे मित्र कौन-कौन हैं और मित्रों के वेश में शत्रु कौन-कौन हैं। शत्रुओं को तो हम जानते हैं और उनसे बचते हुए ही कार्य करते हैं, लेकिन मित्रों के वेश में छिपे शत्रु का पहचाना बहुत जरूरी है। अगर मित्रों में छिपे शत्रु को नहीं पहचान पाएंगे तो कार्यों में असफलता ही मिलेगी।

तीसरी बात: यह देश कैसा है

यह देश कैसा है यानी जहां हम काम करते हैं, वह स्थान, शहर और वहां के हालात कैसे हैं। कार्यस्थल पर काम करने वाले लोग कैसे हैं। इन बातों का ध्यान रखते हुए काम करेंगे तो असफल होने की संभावनाएं बहुत कम हो जाएंगी।

चौथी बात: हमारी आय और व्यय की सही जानकारी

समझदार इंसान वही है जो अपनी आय और व्यय की सही जानकारी रखता है। व्यक्ति को अपनी आय देखकर ही खर्च करना चाहिए। जो लोग आय से ज्यादा खर्च करते हैं, वे परेशानियों में अवश्य फंसते हैं। आय से कम खर्च करेंगे तो थोड़ा-थोड़ा ही सही पर धन संचय हो सकता है।

पांचवीं बात: मैं किसके अधीन हूं

हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारा प्रबंधक, कंपनी, संस्थान या बॉस हमसे क्या चाहता है। हम ठीक वैसे ही काम करें, जिससे संस्थान को लाभ मिलता है। यदि संस्थान को लाभ होगा तो कर्मचारी को भी लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

छठी बात: मुझमें कितनी शक्ति है

छठी और आखिरी बात सबसे जरूरी है, हमें यह मालूम होना चाहिए कि हम क्या-क्या कर सकते हैं। वही काम हाथ में लेना चाहिए, जिसे पूरा करने का सामर्थ्य हमारे पास है। अगर शक्ति से ज्यादा काम हम हाथ में ले लेंगे तो असफल होना तय है। ऐसी परिस्थिति में कार्य स्थल और समाज में हमारी छवि पर बुरा असर होगा।

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