बाबा रामदेव इसे बेच-बेचकर हो रहे अमीर, समुद्र मंथन से पैदा हुई थी ये चीज

पतंजलि नाम आते ही हमारे दिमाग में बाबा रामदेव और उनके आयुर्वेदिक नुष्खे दिमाग में छप जाते हैं। दरअसल हम और आप जिनकी पहले के समय में सोच अंग्रेजी दवा की ओर थी, वो अब देसी दवाओं की ओर बढ़ रही है। कारण है कि अब हम देश प्रेमी हो रहे हैं और प्रचार-प्रसार के जाल में फंसकर देसी कही जाने वाली चीजों को इस्तेमाल करने लगे हैं।

जिसका फायदा उठाकर बाबा रामदेव जैसे योग गुरू उठा रहे हैं। इसके लिए वे जनता को कुदरत की दी हुई औषधियों को व्यापार में बदलकर लाभ दे रहे हैं। जिसका फायदा वो खुद भी उठा रहे हैं।

इनकी सभी औषधियों में से एक है गिलोय। जिसे अमृता और गुडुची भी कहा जाता है। यह कहीं भी लता के रूप में उग आता है। इसकी खासियत ये है कि ये जिस पेड़ पर उगती है उसके गुण भी अपने अंदर समेट लेती है। जैसे कि नीम पर उगी तो नीम गिलोय। वैसे नीम गिलोय सबसे अधिक लाभकारी होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं, लेकिन इनका साइज बड़ा होता है।

बाबा रामदेव

समुद्र मंथन से उत्पन औषधि है गिलोय

हिंदू धर्म की कहानियों के अनुसार समुद्र मंथन के बाद जब राक्षस अमृत लेकर भागे तो अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिर गई। जहां-जहां बूंदें गिरी थीं, वहां गिलोय के पौधे उग आए।

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गिलोय के फायदे

  • एक दिन छोड़कर 10 दिनों तक गिलोय का रस पीलिया रोगियों को पीना चाहिए।
  • रोजाना गिलोय लेने से शरीर के टॉक्सिन बाहर आ जाते हैं। अगर आप रोज इसे यूज करते हैं तो बहुत कम बीमार पड़ेंगे।
  • लता पीसकर खाली पेट पानी के साथ पीने से खून साफ होता है और बढ़ता है।
  • डाइबिटीज के रोगी एक महीने तक लगातार गिलोय का रस पिएं। इससे खून में शुगर कंट्रोल रहता है।
  • झुर्रियां हैं तो गिलोय का पेस्ट बनाकर 15 मिनट तक चेहरे पर लगाएं और फिर ठंडे पानी से धो डालें।
  • इसका रस पीने से स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया और बुखार में फायदा होता है।
  • इसकी डंडी की दातून भी बनाई जा सकती है।
  • इसके पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कानदर्द ठीक हो जाता है।
  • इसको त्रिफला चूरन और शहद के साथ दिन में दो बार लेने से मोटापा कम होता है।
  • गर्मी में कई बार लोगों को उल्टी की समस्या हो जाती है। ऐसे में इसके रस में मिश्री या शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से उल्टियां रुक जाती हैं।

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कैसे बनाते हैं गिलोय का रस

गिलोय का रस बनाने के लिए इसकी डंडी का पतला छिल्का उतारकर इसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लेते हैं। इसके बाद एक बर्तन में दो गिलास पानी के साथ उबाल लेते हैं। जब पानी आधा गिलास रह जाता है तो करके पिया जा सकता है।

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