ये वो वीडियो है जिसे देख हर इंसान कांप जाएगा, दर्द और साहस की है अनोखी दास्तां

डर, समझते हैं न आप… ये सबको लगता है। आपने ये भी सुना होगा कि मर्द को कभी दर्द नहीं होता। लेकिन ये सब सिर्फ बनावटी बाते हैं। जब चोट लगती है, जब किसी का खौफ होता है तो दर्द भी होता है और डर भी लगता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं हिंदुस्तानियों की उन हस्तियों के बारे में जो साधारण परिवार में जन्मे और शेर बने। यहां शेर से हमारा तात्पर्य डाकू से है। जी हां बात हो रही है भारत के 5 उन डाकुओं की जिनके सामने सब गीदड़ बन जाते थे। उम्मीद है आप भी बेसब्री से जानना चाहते होंगे कि आखिर ये 5 नाम हैं किसके। क्योंकि हो सकता है कि आपकी मां ने भी आप से कहा हो कि ‘सो जा बेटे सो जा, वरना गब्बर आ जाएगा’।

वीडियो देखें:

मान सिंह

डाकू मान सिंह को लोग रोबिन हुड मानते थे। ये आगरा में जन्मे और हमेशा अमीरों से पैसे लूटकर गरीबों में बांटा। कहा जाता है कि डाकू मान सिंह ने कभी किसी औरत, गरीब और बच्चे को हाथ तक नहीं लगाता था। वह सिर्फ अमीरों को ही लूटता था। इस डाकू की मौत एक पुलिस एनकाउंटर में साल 1955 में हुई।

गब्बर सिंह

सुल्ताना डाकू

सुल्ताना डाकू गरीब लोगों का मसीहा था। लेकिन इसकी दहशत से कोई इसके सामने सिर भी नहीं उठा सकता था। अमीर लोगों को लूट कर यह ग़रीबों की मदद करता था। सुल्ताना डाकू को ब्रिटिश सरकार ने नजीबाबाद में फांसी भी दे दी थी और वहीं पर उसकी दहशत का अंत हो जाता है।

गब्बर सिंह

फूलन देवी

फूलन देवी, ये ऐसा नाम है जिसकी जिंदगी पर कई डॉक्यूमेंट्री फिल्में बन चुकी हैं। फूलन देवी 1980 के दशक के शुरुआत में चंबल के बीहड़ों में सबसे ख़तरनाक डाकू मानी जाती थीं। फूलन देवी के डकैत बनने की कहानी किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है। इनके साथ कई बार ऊंची बिरादरी के लोगों ने बलात्कार किया और इन्हें खूब मारा पीटा। इस वजह से सिस्टम के खिलाफ लड़ने के लिए फूलन देवी ने बंदूक उठाई और डाकू  बन गईं। उसके बाद ये चुनावी मैदान में भी उतरीं और उत्तर प्रदेश के भदोही सीट से सांसद बनीं। फूलन देवी की हत्या साल 2011 में एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा कर दी गयी थी। तभी से हमारे भारत के बड़े डाकुओं का अंत हो जाता है।

गब्बर सिंह

वीरप्पन

वीरप्पन बहुत खतरनाक डाकू था। जिसका केरल और तमिलनाडू के जंगलों में पूरा दबदबा था। वीरप्पन ने 1970 से अपने अपराधिक जीवन की शुरुआत की। 1972 में उसे पहली बार गिरफ्तार किया गया था। वीरप्पन ने चंदन की लकड़ियों और हाथी के दांतों की तस्करी शुरू की। बाद में वह उन लोगों को भी मारने लगा जो उसके अपराधिक कामों के बीच में आ जाते थे। वीरप्पन के ऊपर 9 लाख 20 हजार डॉलर का इनाम रखा गया था। फिर 2014 में हुए पुलिस एनकाउंटर में उसकी मौत हो गयी थी।

 

गब्बर सिंह

निर्भय सिंह

निर्भय सिंह गुज्जर चंबल के आखिरी बड़े डाकुओं में से एक था। निर्भय सिंह गुज्जर के गुट में कुल 70 से लेकर 75 डकैत थे, जो AK 47 जैसी राइफलों से लैस थे। इनके पास नाईट विज़न दूरबीन, बुलेट प्रूफ जैकेट और ढेर सारे मोबाइल फ़ोन भी मौजूद थे। साल 2005 में पुलिस के बंदूक की गोली द्वारा निर्भय सिंह गुज्जर की मौत हो गई।

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