करीब करीब सिंगल मूवी रीव्‍यू: इट्रेस्‍टिंग स्‍टोरी और कॉन्‍सेप्‍ट के साथ मजेदार है इरफान की फिल्‍म

फिल्म–  करीब करीब सिंगल

रेटिंग– 3

सर्टिफिकेट– U/A

अवधि–   2 घंटा 10 मिनट

स्टार कास्ट–  इरफान खान, पार्वती, नेहा धूपिया, ईशा श्रवणी, नवनीत निशान, अमन शर्मा और ब्रिजेंद्र काला

डायरेक्टर–  तनुजा चंद्रा

प्रोड्यूसर– जी स्‍टूडियोज

म्यूजिक–  अनु मलिक, रोचक कोहली

करीब करीब सिंगल

कहानी–  फिल्म की कहानी जया और योगी के इर्द गिर्द घूमती है। दोनों की उम्र 30 के ऊपर हो चुकी है। पिता की मृत्‍यु के कुछ साल बाद जया अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला लेती है। जया को अपनी जिंदगी में एक ऐसे शख्‍स की तलाश है जो उसे उसकी तरह समझे। ऐसे में जया अपनी प्रोफाइल साइट पर डालती है। कई वाहियात प्रोफाइल को नजरअंदाज करने के बाद जया की नजर योगी की प्रोफाइल पर जाती है। योगी एक मस्‍तमौला इंसान है। वह जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीना पसंद करता है। उसे दिखावा करना या कुछ छिपाना बिल्‍कुल नहीं पसंद है।

योगी की प्रोफाइल देखने के बाद जया उससे मिलने का फैसला लेती है। मिलने के बाद दोनों की काफी समय तक कई बार नोक झोंक होती है। जया के लिए सबसे चौंकाने वाले बात यह होती है कि योगी उससे अपने साथ ऋषिकेश, अलवर और गंगटोक चलने के लिए कहता है। योगी के मुताबिक जया उसके साथ चलकर उसकी एक्‍स गर्लफ्रेंड से मिलकर बात करें और उसे और करीब से जानें।

काफी ना नुकुर करने के बाद वह योगी के साथ सफर करने को तैयार हो जाती है। यहीं से दोनों की जिंदगी और फिल्‍म की कहानी के नए सफर का आगाज होता है। ट्विस्‍ट एंड टर्न से होते हुए कहानी अंजाम तक पहुंचती है।

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एक्टिंग–  इरफान एक बार फिर अपनी जबरदस्‍त एक्‍टिंग से प्रभावित कर रहे हैं। अलग किरदार को भी उन्‍होंने बेहद खूबसूरती से निभाया है। पार्वती और उनके बीच की नोंक झोंक पर्दे पर काफी नजर आती है। इरफान के अलावा पार्वती ने भी बहुत अच्‍छी परफॉमेंस दी है।

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डायरेक्शन– फिल्‍म का डायरेक्शन बहुत अच्‍छा है। डायलॉग्‍स और लोकेशन का उम्‍दा इस्‍तेमाल किया गया है। अलवर, ऋषिकेश और गंगटोक की खूबसूरती के साथ प्‍यार का सफर बहुत ही सुहाना लगता है। तनुजा की पिछली फिल्‍मों की तरह इस फिल्म में भी उनका परफेक्‍शन साफ झलका है। तनुजा की यह फिल्‍म एक टिपिकल लव स्‍टोरी नहीं बल्कि अलग कहानी को पेश करती है। फिल्‍म कई मौकों पर हंसने का मौका भी देती है। कुछ जगह पर फिल्म से दर्शकों का साथ छूटने लगता है।

म्यूजिक– फिल्म के सभी गाने अच्‍छे हैं लेकिन दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने में नाकामयाब सिद्ध हुए है। हालांकि  सभी गानों के मुकाबले फिल्म का गाना ‘जाने दे’ पसंद किया गया है। जाने दे को आतिफ अस्‍लम ने गाया है।

कमजोर कड़ी– क्‍लाइमैक्‍स

मजबूत पक्ष– एक्‍टिंग, डायरेक्शन, लोकेशन

देखें या नहीं–  प्‍यार के हसीन और नोंक झोंक भरे सफर और स्‍पेशल लवस्‍टोरी को देखने सिनेमाघर जा सकते हैं।

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