दुनिया में सिर्फ एक अकेला स्वर्ग से आया पेड़ है पारिजात, इन 15 बीमारियों से देता है छुटकारा

इंसान का बीमारियों से तालमेल बना रहता है। कभी वह निजाद पा लेता है तो कभी घिर जाता है। लेकिन हरसिंगार का पेड़ इन सभी का रामबाण इलाज है। इसमें गोल बीज आते हैं। इसके फूल अत्यन्त सुंदर और सुगन्धित होते हैं। पेड़ को हिलाने से वे नीचे गिर पड़ते हैं। इस पेड़ को संस्कृत में पारिजात कहते हैं। बंगला भाषा में शिउली है।

ये ऐसा पेड़ है जीसमें रात को फूल खिलते है और दिन होते ही जमीन पर गिर जाते हैं। परिजात वृक्ष की प्रजाति भारत में नहीं पाई जाती है। लेकिन भारत में एक मात्र पारिजात वृक्ष आज भी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के अंतर्गत रामनगर क्षेत्र के गांव बोरोलिया में मौजूद है।

इसमें एक साल में सिर्फ़ एक बार जून माह में सफ़ेद व पीले रंग के फूल निकलते हैं। आयु की बात करें तो यह वृक्ष एक हज़ार से पांच हज़ार वर्ष पुराना है। इसकी दुनिया भर में सिर्फ़ पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से एक ‘डिजाहाट’ है। पारिजात वृक्ष इसी डिजाहाट प्रजाति का है।

पारिजात

पारिजात/हरसिंगार के चमत्कारिक फायदे

बवासीर: पारिजात बवासीर के निदान के लिए रामबाण औषधि है। इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन किया जाये तो बवासीर रोग ठीक हो जाता है। पारिजात के बीज का लेप बनाकर गुदा पर लगाने से बवासीर के रोगी को राहत मिलती है।

यकृत या लिवर: 7-8 हारसिंगार के पत्तों के रस को अदरक के रस और शहद के सुबह-शाम सेवन करने से यकृत और प्लीहा (तिल्ली) की वृद्धि ठीक हो जाती है।

हृदय रोग: इसके फूल हृदय के लिए भी उत्तम औषधी माने जाते हैं। वर्ष में एक माह पारिजात पर फूल आने पर यदि इन फूलों का या फिर फूलों के रस का सेवन किया जाए तो हृदय रोग से बचा जा सकता है।

गठिया: पारिजात पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पिस ले और चटनी बनाइये फिर एक ग्लास पानी में इतना गरम कीजिये की पानी आधा हो जाये फिर इसको ठंडा करके पीजिये तो बीस-बीस साल पुराना गठिया का दर्द ठीक हो जाता है।

पारिजात

दाद: हारसिंगार की पत्तियों को पीसकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है। दाद में ये बहुत चमत्कारी औषिधि है।

घुटनों की चिकनाई: अगर घुटनों की चिकनाई (Smoothness) हो गई हो और जोड़ो के दर्द में किसी भी प्रकार की दवा से आराम ना मिलता हो तो ऐसे लोग हारसिंगार (पारिजात) पेड़ के 10-12 पत्तों को पत्थर पे कूटकर एक गिलास पानी में उबालें-जब पानी एक चौथाई बच जाए तो बिना छाने ही ठंडा करके पी लें- इस प्रकार 90 दिन में चिकनाई पूरी तरह वापिस बन जाएगी।

बालों का झड़ना या गंजेपन का रोग: हरसिंगार के बीज को पानी के साथ पीसकर सिर के गंजेपन की जगह लगाने से सिर में नये बाल आना शुरू हो जाते हैं। जड़ो से नये बाल फूटने लगते है।

चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, Encephalitis , ब्रेन मलेरिया: इस के पत्ते को पीस कर गरम पानी में डाल के पीजिये तो बुखार ठीक कर देता है और जो बुखार किसी दवा से ठीक नही होता वो इससे ठीक होता है। जैसे चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, Encephalitis , ब्रेन मलेरिया, ये सभी ठीक होते है। हारसिंगार के 7-8 पत्तों का रस, अदरक का रस और शहद को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पुराने से पुराना मलेरिया बुखार समाप्त हो जाता है।

पारिजात

साइटिका: हरसिंगार या पारिजात के पत्तों को धीमी आंच पर उबालकर काढ़ा बना लें। इसे साइटिका के रोगी को सेवन कराने से लाभ मिलता है। यह बंद रक्त की नाड़ियों को खोल देता है यही कारण है की ये साइटिका में कारगर है।

सूखी खांसी: इतना ही नहीं पारिजात की पत्तियों को पीस कर शहद में मिलाकर सेवन करने से सूखी खाँसी ठीक हो जाती है।

त्वचा रोगों में: इसी तरह पारिजात की पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा संबंधि रोग ठीक हो जाते हैं। पारिजात की पत्तियों से बने हर्बल तेल का भी त्वचा रोगों में भरपूर इस्तेमाल किया जाता है।

पारिजात

श्वास या दमा का रोग: हारसिंगार की छाल का चूर्ण 1 से 2 रत्ती पान में रखकर प्रतिदिन 3-4 बार खाने से कफ का चिपचिपापन कम होकर श्वास रोग (दमा) में लाभकारी होता है।

नोट: हरसिंगार खांसी में नुकसान पहुंचाता है। इसके दोषों को हटाने के लिए कुटकी उपयोग किया जाता है।

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