और कितनी बेरहम होगी खाकी ? पहले हत्या अब जबरन दाह संस्कार !

बाराबंकी- यूपी की पुलिस अक्सर ही किसी न किसी विवादों में घिरी हुई नजर आती रही है। लेकिन इस बार सूबे की पुलिस ने अपनी सभी मर्यादाएं लांघ दीं। और अपनी वर्दी पर लगे दाग को छिपाने की कोशिश की है। मामला है बाराबंकी पुलिस का जहां वर्दी पर एक गर्भवती की हत्या का दाग लगा है और इस दाग को छिपाने के लिए पुलिस हर हथकंडा अपना रही है।

 जबरन शव को ले गई पुलिस

एक गर्भवती महिला की ह्त्या करने वाली आरोपी पुलिस को बचाने के लिए देर रात आधा दर्जन से ज्यादा थानों की पुलिस फ़ोर्स रुचि के घर पहुंची और उसके पति अरविंद से उसका शव छीन लिया। इसके बाद जो हुआ उसे सुनकर शायद आपको भी बहुत गुस्सा आएगा।

रुचि के शव का जबरन दाह संस्कार

रात के वक्त नहीं जलाया जाता शव

हिन्दू धर्म के अनुसार शव को कभी रात में नहीं जलाया जाता लेकिन, बाराबंकी पुलिस रुचि के शव को श्मशान लेकर पहुंची और उसे आग के हवाले कर दिया। मामला यहीं खत्म नहीं होता पुलिस की आगे की करतूत भी सुनिये।

बिलखते रहे परिजन, पुलिस ने नहीं सुनी

रुचि के परिजन रो –रो कर इंसाफ की दुहाई देते रहे लेकिन इंसान से हैवान बन चुकी बाराबंकी पुलिस का दिल नहीं पसीजा। और अपने दामन पर लगी खून की छींटों को साफ करने की कोशिश में लगी रही। शव को आग के हवाले करने के बाद पुलिस ने रूची के पति अरविन्द और उसकी सास प्रेमावती को उसकी जलती चिता के पास जबरन बिठाया।

पुलिस की पिटाई से गर्भवती की मौत

जमीन और पैसों का दिया लालच

रुचि के पति को जमीन और पैसे देने का भी लालच दिया गया। लेकिन जब वो नही माना औप अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने पर अड़ा रहा तो अरविंद को खुद ही उसकी पत्नी की हत्या के आरोप में फंसाने की धमकी दी गई। इस बेरहम करतूत में सीओ, एसडीएम सहित कई थानों की पुलिस फोर्स ने इच्छा के विरूद्ध जाकर अंतिम संस्कार करवाया। जिसकी इजाजत इन्हे न तो समाज देता हगै न ही भारत का कानून ।

मामले में परिवार की रजामंदी ?

सीओ सुशील सिंह की मानें तो, जहां सारे तथ्य पुलिस वालों के खिलाफ नजर आ रहे हैं वहां सीओ साहब का कहना है कि ये सब कुछ रुचि के परिजनों की रजामंदी से हुआ है अगर वो नहीं चाहते तो ऐसा कुछ नहीं होता।

अब सीओ साहब के जवाब पर सवाल ये उठता है कि, अगर ये सब कुछ परिजनों की रजामंदी से ही हुआ है तो खुद पुलिसवालों को शव को अग्नि देने की जरूरत क्यों पड़ गई

(यहां पढ़िये पूरा मामला): देख रहे हैं सीएम साहब… ये कर रही है आपकी पुलिस !

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