दुनिया में टाइमजोन का गड़बड़झाला, सभी देशों ने शिफ्ट कर रखा है समय

नई दिल्ली। टाइमजोन का मकड़जाल अब दुनिया में बढ़ता जा रहा है। दुनिया के अलग अलग हिस्से अलग अलग टाइमजोन में रहते हैं। वैसे कुछ देश समय समय पर अपनी घड़ियों को आगे पीछे करते रहते हैं। हाल में दक्षिण और उत्तर कोरिया ने भी अपने-अपने टाइमजोन मिलाए थे।

टाइमजोन

एक कर दिया टाइमजोन

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने 1949 में सत्ता संभालने के बाद देश में चल रहे अलग अलग टाइमजोनों को खत्म करके पूरे देश में एक टाइमजोन लागू किया। इसे अब बीजिंग टाइम कहते हैं जो ग्रीनविच मानक समय (जीएमटी) से आठ घंटा आगे है। इसका मतलब है कि देश के धुर पश्चिमी प्रांत शिनचियांग के लोगों को बहुत सुबह उठना पड़ता है।

अजब है समय

स्पेन के तानाशाह फ्रांसिस्को फ्रांको दूसरे विश्व युद्ध के दौरान तटस्थ रहे, लेकिन 1940 में जर्मन तानाशाह हिटलर के साथ एकजुटता दिखाते हुए उन्होंने जीएमटी की जगह सेंट्रल यूरोपियन समय को अपना लिया। इसीलिए स्पेन में सूरज जरा देर से ही उगता और छिपता है और उसी के मुताबिक लोगों की जिंदगी चलती है।

छुटकारे के लिए

उत्तर कोरिया ने 2015 में अपनी घड़ियों को आधा घंटा पीछे कर लिया। सरकार ने इसके लिए दलील दी कि वह जापानी औपनिवेशिक पहचानों से पिंड छुड़ाना चाहती है।

भारत से अलग होने की चाह

समय के मामले में नेपाल को भी थोड़ा अलग कहा जा सकता है। उसने अपने पड़ोसी भारत से 15 मिनट आगे का समय चुना। इस तरह नेपाल का समय जीएमटी से 5.45 घंटा आगे है।

बिजली बचाने का अनोखा तरीका

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने 2016 में देश की घड़ियों को 30 मिनट आगे करने का आदेश दिया। इस तरह उनसे पहले राष्ट्रपति शावेज ने 2007 में जो समय बदला, उसे मादुरो ने पलट दिया। 2007 में यह सोच कर समय बदल गया था कि सूरज की रोशनी ज्यादा देर तक रहने से बिजली की खपत कम होगी।

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